कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3859

भाषा / Language

हमारे बीच कुछ भी तो नहीं

हमारे बीच कुछ भी तो नहीं... न साथ न शब्द न स्पर्श मैंने उससे कहा हमारे बीच संभावना तो है ... ये कह कर उसने एक बार फिर मुझे निःशब्द कर दिया। *तस्वीर में एक मैं तो मुस्कुरा रही ...उसका पता नहीं😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें