कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3818

भाषा / Language

बहुत शुक्रिया ईश्वर

बहुत शुक्रिया ईश्वर ..... सच में , सच्ची में और सच्चाई में लोग तीन अलग अलग रूप के होते हैं। हैरत की बात ये है कि प्रेम भी इन्हीं लोगों में ढूंढता पड़ता है। ईश्वर तुम आसपास रहते हो तो ... धोखे तो मिलते हैं धोखेबाज नहीं मिल पाते। मेरी आंखें बने रहना। मुझे सिखाना। एक तुम पर आंख बंद कर विश्वास किया है । अपने प्रेम सा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें