कल्पनाशब्दों के बीच
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जिस पल दो मन मुस्कुराए और बस ईश्वर साक्षी रहा...वही प्रेम है

जिस पल दो मन मुस्कुराए और बस ईश्वर साक्षी रहा...वही प्रेम है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें