भाषा / Language
आ गये
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आ गये ...
बाहर पायदान पर किस्से - कहानियां पोंछ दो
ये लो पानी ....सारी नज़्में - गज़लें धो डालो
वहाँ दरवाज़े पर रखे तोलिये से सारे नग़्मे - गीत सुखा डालो
खुद पर से ये सारी लप्रेक सारी क्षणिकाएं झाड़ लो
देख लो ...
कुछ भी बाक़ी न रहे
न एक पंक्ति
न एक शब्द
न एक अक्षर
अब आँख बंद कर के छू सकते हो मुझे.....
मैं कल्पना हूँ।
*मैं बस लिखती हूँ.... कविताई नहीं करती।
आप सब उसमें से कविता बना लेते हैं।
आपका मन मेरी आँखों से कहीं सुंदर है।
जो महसूसता है वही....ज़िंदा है।
आप सब का शुक्रिया💐
आपके समय का शुक्रिया💐
साथ रहें ....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें