कल्पनाशब्दों के बीच
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ज्यादातर हम बस लिख देते हैं मुक्त होने की प्रक्रिया में....…

ज्यादातर हम बस लिख देते हैं मुक्त होने की प्रक्रिया में...... पाठक का सुंदर मन खुद कविता खोजता हुआ आता है और सादगी से लिखे हमारे मन की व्यथा कथा में से कोमल पंक्तियों को कविता कह कर खुद में समाहित करता जाता है। वो जो जीता तो कवि की तरह ही है ,पर इस जिये को लिख नहीं पाता। पाठक कवि बनाता है। कवि से कविता वही निकाल पाता है। कवि बस लिखना जानता है।😊😊😊 *मन कहता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें