भाषा / Language
तुमसे नहीं
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*तुमसे नहीं ...
ये हमारे बीच का जो कुछ नहीं है ना....वो फ़रेबी है
मुझे उससे मिलना है।
*तुमने हमेशा मेरी तरफ अपनी चुप्पियां सरकाई।
तुम से ऊब कर अब उनके प्रेम में पड़ गयी हूँ....
तुम से एक रोज़ छूट जाऊंगी
चुपके चुपके
*जिंदगी रोज़ मेरे घर आती है
मैं ये कह कर लौटा देती हूं...
तुम गलत नहीं थे...
बस मेरे नहीं थे।
मैं छूटने टूटने से परे हूं
रहूंगी यहीं सदा।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें