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रोज मन को उबालना

रोज मन को उबालना.... कभी कच्चा पक्का कभी पक्का कच्चा ... मेरे लिए तो यही कविता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें