भाषा / Language
मुखरता
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मुखरता...
चुप्पी के होंठ चूमते जाना
भीड़....
मेरे वाले *तुम* का विलोम
कविता.....
अक्षर का अक्षरा हो जाना
मौन...
किसी *कौन* से सारी ध्वनियां लिपियां छीन लेना
यश....
जीवन का खोया पाया वाला बिल्ला नंबर
नैतिकता....
इस शहर की आखरी वीरान ड्योढी
नींद.....
दिन भर डाकिए के हाथों में भिंची बैरंग आखरी चिट्ठी
जीवन....
दिन भर के फुटकर नोट्स की unbinded किताब
शांति....
शोर की गंधर्व प्रेमिका
एकांत....
दुःख और सुख के बीच का योजक चिन्ह
मृत्यु....
जिंदगी का खोया आधारकार्ड
ईश्वर....
मेरे एकांत का दूसरा आधा हिस्सा
प्रेम....
मेरा पराग कण
* शाम डूबते हुए देखना सुख है । रोज़ शाम को थपकी देकर रात के सुपुर्द कर देना उससे भी बड़ी आश्वस्ति कि कल यही सूरज आगोश में भरेगा मुझे। उम्र का एक पत्ता और सूखा।एक दिन और गुजर गया।
तस्वीर कुछ देर पहले की है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें