कल्पनाशब्दों के बीच
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जिंदगी को प्यारा सा नाम देना हो तो क्या कह कर पुकारोगी कल्पना

जिंदगी को प्यारा सा नाम देना हो तो क्या कह कर पुकारोगी कल्पना? *सुनो ना संगमरमर* ! मैंने कहा। *आप भी देकर देखिए एक नाम जिंदगी को... मैं सुन रही।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें