भाषा / Language
अभी वो कमसिन उभर रहा है अभी है उस पर शबाब आधा
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अभी वो कमसिन उभर रहा है अभी है उस पर शबाब आधा
अभी जिगर में ख़लिश है आधी अभी है मुझ पर इताब आधा
कभी सितम है कभी करम है कभी तवज्जोह कभी तग़ाफ़ुल
ये साफ़ ज़ाहिर है मुझ पे अब तक हुआ हूँ मैं कामयाब आधा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें