कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3644

भाषा / Language

अभी वो कमसिन उभर रहा है अभी है उस पर शबाब आधा

अभी वो कमसिन उभर रहा है अभी है उस पर शबाब आधा अभी जिगर में ख़लिश है आधी अभी है मुझ पर इताब आधा कभी सितम है कभी करम है कभी तवज्जोह कभी तग़ाफ़ुल ये साफ़ ज़ाहिर है मुझ पे अब तक हुआ हूँ मैं कामयाब आधा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें