कल्पनाशब्दों के बीच
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यूँ सोहबतों में मोह ना मिलाया करो

यूँ सोहबतों में मोह ना मिलाया करो... मुहब्बत चाशनी हो जानी है। खामोशी को खामोशी से जोड़ा घटाया गुणा किया भाग भी देकर देखा खामोशी टस से मस न हुई। शून्य को तकती तकती चांद हो गई। * दूर एक टुकड़ा खामोशी चमक रही अपनी वाली से मिला कर देखो... इत्र गिरेगा। शुभरात।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें