भाषा / Language
अपनी कल्पनाओं से प्यार करो।
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अपनी कल्पनाओं से प्यार करो।
उन्हें तितली की तरह अपने सर के ऊपर मँडराने दो।
रुक कर दो पल ठहर जाओ
टेक ले लो
मूंद लो आँखें
दो पल उसे सोचो जो तुम्हें इस दुनिया में सबसे ज्यादा प्रेम करता है।
तुम जिसे प्रेम करते हो उसे भूल जाओ।
कम संभव है कि दोनों एक दूजे के लिए हों।
अगर हों तो घुल जाओ।
मगर अगर कोई है जो तुम्हें प्रेम करता है ...
उसकी आँखें पढ़ो ।
उसकी खामोशी छू कर देखो।
उस को ज़िन्दगी देकर देखो
उसके लिए कुछ दृश्य ही बना दो
कोई संवेदना ही रख दो हथेली पर।
उसे स्मृति दो
जानते हो ये कल्पना स्मृति की सखी है ।
डोलती रहेगी
विस्मृति में भी तुम्हारे आसपास
तुम हूबहू लौटोगे
वो जी जाएगा कुछ देर
*तस्वीर बीटल्स आश्रम की एक दीवार की है।
उदासी और प्रेम लिखे हुए खूबसूरत लगते हैं ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें