कल्पनाशब्दों के बीच
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अक्सर थक कर तुम्हें छोड़ने का मन बना लेती हूँ।

अक्सर थक कर तुम्हें छोड़ने का मन बना लेती हूँ। उदास हो? पूछ कर तुम फिर मुझे मना लेते हो। Beatles ashram में एक घोर उदासी है। इतनी कि लगता है सब अपनी उदासी यहां जमा कर जाते हैं। कभी गुलजार रही यह जगह अभी छोड़ी हुई प्रियतमा सी लगती है। लगता है कोई प्रेमी अपना यादाश्त खो चुका और हर दीवार हर स्तंभ पर कुछ कुछ लिख कर अपने होने को जाहिर कर रहा। उजडी उदासीन सी इस फिज़ा में चौरासी कुटिया हैं । ध्यान ,मनन और ज्ञान का कभी ये घर आज बस कुछ रंगीन दीवारों पर सिमट कर रह गया है। परदेसी पर्यटक इनके साथ खुद की तस्वीरों में खुद की उदासी पोत आते हैं ... मुस्कुराते हुए कौन अच्छा नहीं लगता? उदास होने से अच्छा है मुस्कुराकर दीवारें रंग दो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें