भाषा / Language
मनुष्य और प्रेमी में बहुत अंतर है।
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मनुष्य और प्रेमी में बहुत अंतर है।
तुम गच्चा कम खाया करो ।
मनुष्यता में बहुत सारा प्रेमी एक बार को फिर भी मिल सकता है।
पर प्रेमी में बहुत सारी मनुष्यता मिल ही जाए....शक है।
मुहब्बत का चश्मा समय समय पर बदलना चाहिए।
मुआ घिसता जल्दी जल्दी है
चटकता उससे भी जल्दी जल्दी है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें