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पिताजी की सबसे खास बात ये है की उनसे जब भी पूछो आप कैसे हैं…

पिताजी की सबसे खास बात ये है की उनसे जब भी पूछो आप कैसे हैं ...तो हमेशा कहते हैं मैं बिल्कुल स्वस्थ हूं।मेरी चिंता मत करना। । बस जरा बुढ़ापा है। हाथ पैर में उतनी फुर्ती नहीं रही । काम करने का मन करता है पर हिम्मत नहीं होती। सफेद हाथी हो गया हूं। बैठा रहता हूं। वे कभी नहीं कहते कि कोई तकलीफ है या तबियत ठीक नहीं। हम सब हमेशा कहते हैं ...जीवन भर आपने काम ही किया है। इसलिए स्वस्थ हैं। आपकी पूजा पाठ आपकी औषधि है। पिताजी आज भी दो घंटे का पूजापाठ जप ,अपने नित्यकर्म ,अखबार पढ़ना,किताबें पढ़ना,फूल पत्तों की देख भाल खुद करते हैं। मैं उन्हें हर बार उपहार स्वरूप किताबें ही देती हूं। उन्हें पसंद नहीं किसी को भी अपने साथ लगाए रखना। बेहद जिंदादिल और शानदार व्यक्तित्व। ज्ञान का भंडार। वैसे तो कभी कभी भूल जाते हैं पर पुरानी पहाड़ों की स्मृति अभी तक ज्यों की त्यों है। अल्मोड़ा का नाम लेते ही उनकी रगों में लहू तेज़ दौड़ने लगता है और चेहरे की चमक देखने लायक होती है। अभी वो दीदी के पास हल्द्वानी रहते हैं। मई में उन्हें अल्मोड़ा ले जाने का वादा है। हम आयेंगे। आप हमारे पांडेखोला पांडे परिवार के स्तंभ हैं । आप पर हम सबको नाज़ है। आप स्वस्थ रहें ऐसे ही मस्त रहें। जन्मदिन शुभ रहे। भव्या और दक्ष की तरफ से भी दादाजी को प्रणाम और जन्मदिन मुबारक आप सब को भी रामनवमी की शुभकामनाएं
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें