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है तो गणित पर कला से ही हल होता है....प्रेम

है तो गणित पर कला से ही हल होता है....प्रेम 😊😊😊 *जब जब टूटेंगे तुम्हारे पास ही आयेंगे। मैंने कहा है मेरे पास एक ही पता है जो मुझे पता है। *तुम मन से निकल गए हो। इंतजार में रुके हुए हो। जहां ज्यादा रहे उस गली उस शहर को छोड़ने में वक्त तो लगता ही है। *आंखों में अब नहीं रहे तुम ... बह गए जुबान पर अब भी हो। तुम मेरा मोह मंत्र हो। भूलने में समय तो लगेगा। *तुम तक लौटूंगी नहीं अब .... किसी रोज आऊंगी तुमसे मिलने। प्रेम में मेरे पास बस इतनी आश्वस्ति है तुम को देने के लिए। सदा रहेगी! *नाम बाद में जाना ....चेहरा पहले चुना जो पहले चुना वो और जो बाद में जाना वो दो अलग किस्म के लोग थे। मिले दोनों नहीं ... हमको दीवाना कर गए। *कुछ भी पढ़ लूँ.... लिखे तुम ही जाते रहोगे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें