कल्पनाशब्दों के बीच
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मन देखने दिखाने वाली चीज़ नहीं है।

मन देखने दिखाने वाली चीज़ नहीं है। जिसमें तुम्हें पढ़ने का हुनर होगा वो अपनी ब्रेल खुद बना लेगा तुम उसे प्रेमी कहना उसकी लिपि को बूझ लेना उसे मन में आने देना आँखें मूंदे मूंदे.... शुभदिन💐 *मैं तैनू समझावां की..... बेहद दिलकश गीत अभी कार में बज रहा। सुनिए।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें