प्रेम को मैंने मन से उतार कर पीठ पर धर लिया है। अब दुखता कम है। आबाद रहिए दिल...
रचना 36041 अप्रैल 2022भाषा / Languageहिन्दीEnglishप्रेम को मैंने मन से उतार कर पीठ पर धर लिया है।✦प्रेम को मैंने मन से उतार कर पीठ पर धर लिया है। अब दुखता कम है। आबाद रहिए दिल...कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें