भाषा / Language
ऐ समुंदर
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ऐ समुंदर .......
बेशुमार अपनी लहरों का गुमान न रख
बेहिसाब अदाओं से रूबरू हुआ
जो इक बार मेरी
खामोखां ......
पानी पानी हो जाएगा
*समुंदर विदेशी है... मैं बिल्कुल देसी
कभी कभी कुछ तस्वीरें बातें करती हैं।
जब समंदर याद आता है तो रेत भी साथ चली आती है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें