कल्पनाशब्दों के बीच
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सुनो

सुनो ..... वो क्या है ? जो सिर्फ दो मिनट में मिल जाता है बिना ढूंढे .......तुममें उफ्फ्फ....... "गूगल "क्यों कर रहे ? साफ़ दिख रहा है तुममें ..... मेरा .......चैन 😊😊😊😊😊😊😊 अभी कार में आशा जी का ये गीत बज रहा....चैन से हमको कभी आपने जीने न दिया। शरारत से भरी कल्पना कैद कर रही थी ....कान्हा जी का श्रृंगार हो गया। मैं प्रेम में भीग गई।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें