ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3592

भाषा / Language

भीगे बादाम तक फूल जाते हैं

✦
भीगे बादाम तक फूल जाते हैं .. आज आंखें बादामी हैं रुआँसा थोड़े ही हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें