कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3591

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आपको कई बार कहा चले जाइए

*आपको कई बार कहा चले जाइए... पर आप चले मत जाना। उदासी में अंगुलियों को भी होश नहीं रहता । कुछ भी कह देती हैं। *आपका नशा लगा है मैं आपको दगा दे नहीं सकती। मैं इस झूम की आदी हूं। आपका जाना ...कम हो जाना है जिंदगी का । *जिन्दगी ठीक उसी समय फोटो खींचती है जब आप सबसे ज्यादा निरीह होते हो या सबसे जादुई। बाकी समय जिंदगी सेल्फी लेती रहती है। आप जिंदगी से काफ़ी मिलते जुलते हुए लगते हो यार। *रोज रोज तार तार होते हैं कुछ इस तरह गिरफ्तार होते हैं दिल बेहद बेवजह शे है हम भी तो बेहद बेवजह लोग हैं। बेवजह मिलने वाले बेवजह नहीं मिलने वाले *मुझे शौक था "रहनुमा" शब्द खुद में गोदने का तुम कब घुल गए मुझ में? पता ही नहीं चला *चैन की खरीद फरोख्त करने गए। बेचैनियां उठा लाए तुम्हारी तस्वीर ....तुम्हारा जिक्र मेरे जानी दुश्मन हैं। *मंजिल लपेट कर छुपा दी और मंजिल ही तलाशने निकले हैं हम प्रेमी थोड़े हैं बेरंग हवा हैं तुम क्या हो मेरी जान? *मेरी अपनी तड़प को किधर भी दबा दूं मैं ... आपका चेहरा नजर आता है। आपका नाम उभर आता है। *दिल को कौन पूछे... कैसे हो? सब अपने अपने तूफान के जिम्मेदार हैं ! *बातों के सिल सिले टूटे हैं । ना आप हमसे गए ... ना हम आपसे रूठे हैं *तुमको बस एक इल्जाम देंगे पराया कर गए । प्यास को प्यास का जादू तो ना दिखाते । इतना तो कर जाते। मदहोशी छोड़ जाते याद नोच ले जाते। *काफिला बहुत बड़ा है मेरा मुझमें तीन मनके आपके नाम के... बारी बारी लौटते हैं मुझमें मैं तर हूं ...बस आपसे ******धड़क में बेधड़क रहूंगी... मैं लिखूंगी अपने दिल का हर उठता गिरता note 🎶 आज बहुत दिनों बाद दिन में सो गई।सो कर उठी तो ये गाना हेड फोन में बज रहा था। शायद गाने सुनते सुनते ही आंख लग गई। मुझे बहुत पसंद है ये गीत।इसको कई बार सुनते सुनते जो मन आया लिख दिया। गीत सुनिए आप।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें