कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3590

भाषा / Language

तुमसे इश्क़ लगाएंगे

तुमसे इश्क़ लगाएंगे.... उसकी बाजियां क्यों लगाएंगे? तुम मुझे उस तरफ़ से कभी नहीं देखते पर मैं उस तरफ से जाकर भी तुम्हें ही अपनी तरफ देख पाती हूं। मेरे लिए इस तरफ भी उसी तरफ है।प्रेम में दिशा गुम और तरफा तुम हो जाता है। नादानियां हैं रे तुम क्या समझोगे जादुई भ्रम तुम सलीकेदार दरख्त रहना मैं बागी आवारा हवा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें