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तेरे हाल में अपना हाल मिलाया जाए

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तेरे हाल में अपना हाल मिलाया जाए बात बात में कोई समंदर गलाया जाए हम भी हैं क्या और तुम भी कौन हो? हर मसला वक्त रहते सुलझाया जाए तस्वीर में हंसी बदन से रूठी है शायद मुझे नहीं, कूची चूमो... उकसाया जाए अरसे से आया ही नहीं बेजार पतझर जिंदगी का नुक्ता खुद ही मिटाया जाए वो आए न आए, ये मसला कुछ और है इस बेचैनी को कहो कैसे सुलाया जाए इक पल में ही कर लें हजार सौ बातें चुप्पी को ज़रा उधर सरकाया जाए मुझे आसान है बुद्धू बना ले जाना बस झूठ का शीरा ना मिलाया जाए *शाम हसीन है ...कल्पना शिरीन
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें