भाषा / Language
मेरा एकांत
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मेरा एकांत....
कुछ पल अपने कान उतार कर रख देना और ज़ुबान तह लगा देना।
खुद से मूक बधिर हो जाना।
समय की पीठ पर कुरेदना दो आंखें और एक हज़ार मन
उन हज़ार मन पर बांध देना कई हजार दिल वाले गुब्बारे
कुछ उड़ाना
कुछ फोड़ देना
कुछ बस रख लेना।
एक का अंत.... एकांत
आसान शब्दों में कहूं...खुद सिर्फ़ अपने साथ चिड़िया उड़ ... तोता उड़...मैना उड़ खेलना।
लिखना उम्र और वक्त सहलाने जैसा है मेरे लिए। लिखती हूं उलजलूल बातें।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें