कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3522

भाषा / Language

अश्कों को राजदार चाहिए था

अश्कों को राजदार चाहिए था... उन्होंने आंखों पर भरोसा किया मैंने तुम पर प्रेम के पार भी कई छोटे छोटे प्रेम उगा देती है ज़िन्दगी मुस्कुराइये..... कि अभी बहुत ज़िन्दगी बाक़ी है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें