भाषा / Language
दिल लरज़ने की बात भर है इश्क
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दिल लरज़ने की बात भर है इश्क
बेज़ार हो रोने की बात भर है इश्क
कश्ती झोंके समंदर और ये तुम
बिन पानी डूब की बात भर है इश्क
कौन बूझेगा बाद तुम्हारे ये मेरी अदा
इक इत्तू से इशारे की बात भर है इश्क
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें