कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3511

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एक ही हथेली पर दो फूल खिला सकती हो

एक ही हथेली पर दो फूल खिला सकती हो? लड़के ने पूछा लड़की ने डायरी का पहला पन्ना फाड़ कर लड़के की हथेली में भर दिया। लिखा था.... मैं बातों की गुल्लक थी ..... और वो किताबों का जखीरा। लड़के ने देखा उसकी हथेली पर उसी पल *मैं* और *वो* दो शब्द फूल हो गए। कौन सदाबहार ? कौन पारिजात ? उफ्फ... अब ये भी मैं ही बताऊं? तुम सिर्फ़ हथेली देखते रहोगे? मेरी बात मुबारक .... पारिजात मुबारक *हम लिखते थोड़े ही हैं तेरे बाद तुझको हम ढूंढते हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें