भाषा / Language
तुम्हारी वाली दस्तक के इंतज़ार में
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तुम्हारी वाली दस्तक के इंतज़ार में ....
चलो कुछ दिन खुद से रूठकर देखते हैं।
*जब कुछ न हो करने को तो खुद के पास चुपके से पहुंच जाना चाहिए।
एक शहर से दूसरे शहर जल्दी पहुंच जाते हैं ।याद का हवाईजहाज है
हवा के झोंके हैं
धूप है , प्लेलिस्ट है ,मैं हूं
और
बालकनी है।
अपनी तस्वीर को बनाने मिटाने का अपना सुख है। बेचैनी नहीं होती।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें