भाषा / Language
अब जब हर दिशा युद्ध की ओर ही रुख कर रही
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अब जब हर दिशा युद्ध की ओर ही रुख कर रही....
हर प्रार्थना दुआ रेत हो रही
हम तैयार हैं।
हम लड़ लेंगे।
तुम
कितने भी गोले दाग लो हम पर
नीले आकाश से पीले सूरजमुखी ही झड़ेंगे
तुम एक रोज़ दब जाओगे
इन दो रंगों के बीच
तुमको श्राप लगेगा हरे रंग का...
जो इनको घोलने से लीपा जा सकता था हमारे वतन की मिट्टी पर
हमारे अधजले मनों पर
तुम्हारी नस्लें इन दो रंगों के गुम होने का इल्ज़ाम तुम पर दागेंगी
तुमको भी हरे रंग की बददुआ ही मिलेगी।
तुम ठुक जाओगे
बिना कील
बिना सलीब
हमको ताबूत काठ का सही...
तुमको तख्त रक्त का मुबारक
*तस्वीर इतनी दारुण है कि उंगलियां चलने लगी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें