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रचना 3506

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मैं तुम्हारे शहर को याद ही तुम्हारे नाम से करती हूँ।

मैं तुम्हारे शहर को याद ही तुम्हारे नाम से करती हूँ। सरक कर पास आ जाता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें