कल्पनाशब्दों के बीच
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उदासी तुम आओ तो मेरे होंठ चूमा करो

*उदासी तुम आओ तो मेरे होंठ चूमा करो ... माथा चूमती हो तो खामोखां झुर्रियां छोड़ जाती हो। सबसे प्रेमिल कविता मौन के फूलों से लिखती हूं। जैसे ये लिखा... मन में बेचैनी का हिस्सा रखना मेरा मिलने पर यही तोहफ़ा लूंगी तुमसे। दुःख कतरा कतरा रखूंगी तुम्हारे बाएं कांधे और अपने दाहिने में तुम्हारे लिए अपना अपार तुम मेरी बेचैनी को सुख नाम देना मैं अपने हिस्से को कहूंगी नियति। *अपना पसंदीदा गीत सुनते हुए लिखी है उदास पंक्तियां। गीली हों शायद। शुभ रात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें