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टेसुओं का सुर्ख रंग मांग में सजाकर
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टेसुओं का सुर्ख रंग मांग में सजाकर
मोगरे की लड़ियों को वेणी बनाकर
जूही की कलियाँ नयनों में धरकर
गुलाब की पंखुरियां अधरों में मलकर
सोनजुही की महक आँचल में भरकर
सूरजमुखी सा चेहरा बनाया
आज मैंने कमल सा रूप सजाया
बैरी पिया धीरे से बोले .......
सुनो ,बसंत आ गया है क्या ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें