भाषा / Language
युद्ध में एक युद्ध प्रेम भी है
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युद्ध में एक युद्ध प्रेम भी है ...
*नहीं * से उपजा
*हां * से जन्मा
इंसानी भी
बारूदी भी
मिल्कियत से अहमियत की ओर रेंगता हुआ
मन से शहर
शहर से देश
देश से पर देस को डंसता हुआ
प्रेम से दास्तान का मंजर नहीं
प्रेम से दासता लिखे जाने का मंजर बाकी है।
युद्ध में कई सौ युद्ध और होने बाकी हैं।
युद्ध संक्रामक हैं
प्रेम से कई गुना अधिक
ईश्वर रहम
War is a WAR
in every language
In every phonics
In every meaning
And in every manuscript.
As is *No*
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें