ककल्पनाशब्दों के बीच
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हम सब लिख लिख कर अपने एकांत में खुद के लिए कितनी भीड़ बचाते…

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हम सब लिख लिख कर अपने एकांत में खुद के लिए कितनी भीड़ बचाते हैं। हमें पसंद है .....पहुंचना *कविता क्या है कल्पना? ज़िन्दगी लिखी हुई ...... बस बालिश्त भर तू और मैं सांझी उदासी में फड़फड़ाते हुए पाखी खुद को परिष्कृत करना ... प्रेम लिखना फिर उसी पारस को छू कर कागज़ कह देना। ख्वाब देखना और हकीकत से साफ मुकर जाना।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें