भाषा / Language
लेखनी नम्रता है कपट नहीं।
✦
लेखनी नम्रता है कपट नहीं।
कागज़ पर कपट चाहे शिरोरेखा के नीचे छिप जाए रोजमर्रा जिंदगी में कारनामे उघड़ कर आ ही जाते हैं।
आप किसी लेखनी से अपने दाग़ मिटा नहीं सकते।
Best seller नहीं best soul तो बनिए पहले।
जो आपको नहीं जानते उनसे वाह पाना आसान है।
जो आपकी रग रग ,आपके राग रंग से वाकिफ हो उससे पीठ पर धौल पाना
असली वाह है
अपने शब्दों से आंख मिलाने का हुनर हो....
आपको मेल खाना ही चाहिए अपने लिखे से। काल्पनिक कहानी होती है .... व्यक्तित्व आपका संगमरमर रहे।
बात तब है।
आप सो सको चैन से।
लिखे बिना भी
लिख कर भी।
आँखें ढूंढ लेती हैं तुम्हारे शब्द
और कान तुम्हारी उपस्थिति
हृदय के भीतर या बाहर
तुम जानो... तुम्हारे काम जाने।
पोस्ट उन दोस्तों के नाम लिखी है जो हैं पर हैं जैसे नहीं लगते इस पटल पर।
धोखेबाज टिक नहीं पाते
कहीं भी
न कागज़ पर
न दिल में
उनकी तरफ इशारा नहीं पीठ रहे मेरी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें