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जनने के बाद हर मां अपनी बेटी को नाल काटना जरूर सिखाए।

जनने के बाद हर मां अपनी बेटी को नाल काटना जरूर सिखाए। उसकी उड़ान के रास्ते में जो आए वो उसे आजाद कर सके । उसकी उंगलियों में रहे वो हिम्मत कि अपनी तरफ आती हर ना को वो अलग कर सके। वो हर कैक्टस के कांटे तोड़ सके । हर अवसर को छीन सके। ताश के पत्ते खुद फूंक के गिरा सके। फिर चाहे वो कोई भी हो। फिर चाहे वो कैसा भी हो। मैंने भव्या को यही हौसला दिया कि...जा उड़ जा। मन के भीतर एक इशारा बैठा रहता है ...बस उसकी सुनना। ईश्वर अपना छत्र जिद्दी बेटियों पर दोहरा रखता है। मंतर फूंका है उस पर ..... Never compromise And if u choose to do so... Never regret Choose the ultimate.... And never let it go. मां की परियों को आसमान में घर बनाना ही होता है । उनका जहां वहीं है मन के पार । जो होना चाहो वही होकर रहना मां Bhavya Pandey *तस्वीर में भव्या है ।मेरी 21 साल की बेटी जो परदेश में हर दिन अपने हिस्से की एक लड़ाई लड़ती है। मुस्कुराती है। उदास भी होती है। पर लगी हुई है। आप सब का आशीर्वाद बना रहे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें