कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3419

भाषा / Language

उद्दण्ड प्रेमिकाओं को प्रेमी सदा चुप बेहद शांत मिले।

उद्दण्ड प्रेमिकाओं को प्रेमी सदा चुप बेहद शांत मिले। वो जो जानते थे कि इस नदी का उद्गम एक बेहद शांत स्त्रोत है। यह पानी से बनी उर्वरा देह है जो अगर छबीली न रही तो मर जाएगी। चुप प्रेमियों ने कई नदियों को सूखने न दिया। चुपचाप पहाड़ को गांव से गांव को शहर से शहर को समुंदर से जोड़ दिया। उदण्ड छबीली ... गहरी नींद सो गई। एक प्रेमिका खो गयी। चुप प्रेमी एक बार फिर पहाड़ हो गए। शुभ रात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें