भाषा / Language
बिना आवाज़ टूट जाने और बिना छुए जुड़ जाने का फ़ख़्र हासिल है।
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बिना आवाज़ टूट जाने और बिना छुए जुड़ जाने का फ़ख़्र हासिल है।
आप तो "शब्द" ही कहोगे ।
पर मैं हर बार "औरत " सुनना पसंद करूँगी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें