कल्पनाशब्दों के बीच
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सुबह ईश्वर के लिए फूल चुनने गयी तो एक ही अंगुली में दो जगह…

सुबह ईश्वर के लिए फूल चुनने गयी तो एक ही अंगुली में दो जगह कांटे चुभ गए। लगा तुमने पहले आँखें फिर माथा चूम लिया मेरा। दिन भर मीठा मीठा दर्द रहा... रात समझ आया कि नाराज़गी होठों की थी। शुभरात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें