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रचना 3379

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उसे मेरी काबिलियत का अंदाजा है

उसे मेरी काबिलियत का अंदाजा है..... इतनी आसानी से वो भी हां क्यों कहेगा। ****कभी उसके लिए दुखे हो जो मन का हो पर मन का ना करता हो? लड़की ने पूछा माने? लड़के ने हैरान हो कर पूछा। अरे प्रेम किए हो?लड़की ने हंसते हुए पूछा किए तो हैं शायद। लड़के ने झेंपते हुए कहा। दुःख जैसा दुःख तो न लगा कभी। धत्त तुम तो दुखे भी नहीं मन से। मन का प्रेम क्या ख़ाक किया। लड़की ने बड़े से दिल पर अपना ही नाम लिखा और तीर से भेद दिया। लड़की का नाम *क* से शुरू होता है। मैं जानती हूं। सुनो लड़के ! तुम्हारा नाम क्या है? तुम भी *क* से शुरू क्यूं नहीं हो जाते?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें