कल्पनाशब्दों के बीच
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आदरणीय Ajamil Vyas सर...क्या कहूं ।आपने इतने प्रेम से पढ़ा…

आदरणीय Ajamil Vyas सर...क्या कहूं ।आपने इतने प्रेम से पढ़ा कि आंसू झर झर बहने लगे। कई सालों से लिख रही। पर इतना मारक सिर्फ आप ने पढ़ा। मेरी कल्पना सचमुच लाइव हो गई। आपने जो कविताएं चुनी वो भी ऐसा लगा जैसे मैंने उन पर अंगुली रखी हो कि ये पसंद हैं मुझे। आपने मेरा अंतस पढ़ लिया। आपकी आवाज़ ...अहा इतना खूबसूरत तोहफ़ा । नमन आपको कल्पना मुस्कुरा रही दुआएं दे रही। चरणवंदना मेरी जिंदगी आप जैसे प्रेमिल जनों से महकती है। *आप सब भी मेरा लिखा सुन सकते हैं ।लिंक कमेंट बॉक्स में भेज रही। सराहें ,प्यार करें, मन लिख दें वहां जाकर ।हम दोनों को और क्या चाहिए होगा इस प्रयास पर। शुक्रिया।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें