भाषा / Language
तुमसे उदास होती हूं तो पहाड़ इशारे कर बुलाता है।मुझे भटकने…
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तुमसे उदास होती हूं तो पहाड़ इशारे कर बुलाता है।मुझे भटकने नहीं देता पल भर भी।
पहाड़ छूटते हैं तो तुम मोहने लगते हो। तुम्हारा सम्मोहन मुझे प्रेमिल रखता है।
दो प्रेमियों वाली कल्पना जिए जा रही ।
मुस्कुराए जा रही।
कम ना पड़े दोनों कभी
रहें सदा।
*तस्वीर अल्मोड़ा से कुछ दूर पहले बस अभी ली है। प्रेमी खूबसूरत है ।मैं बेतरतीब हूं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें