*तुम* लिखते ही कागज़ भर जाता है और मन भी। कविता बलखाती कल्पना भर है।
रचना 33597 जनवरी 2022भाषा / Languageहिन्दीEnglishतुम* लिखते ही कागज़ भर जाता है✦*तुम* लिखते ही कागज़ भर जाता है और मन भी। कविता बलखाती कल्पना भर है।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें