कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3357

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बेहद रूमानी बातें कभी खुद से भी किया कीजिए

* बेहद रूमानी बातें कभी खुद से भी किया कीजिए....  नीयत-ए-शौक़ भर न जाये कहीं तू भी दिल से उतर न जाये कहीं आज देखा है तुझे देर के बाद आज का दिन गुज़र न जाये कहीं न मिला कर उदास लोगों से हुस्न तेरा बिखर न जाये कहीं नासिर काज़मी »
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें