भाषा / Language
बेहद रूमानी बातें कभी खुद से भी किया कीजिए
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* बेहद रूमानी बातें कभी खुद से भी किया कीजिए....
नीयत-ए-शौक़ भर न जाये कहीं
तू भी दिल से उतर न जाये कहीं
आज देखा है तुझे देर के बाद
आज का दिन गुज़र न जाये कहीं
न मिला कर उदास लोगों से
हुस्न तेरा बिखर न जाये कहीं
नासिर काज़मी »
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें