कल्पनाशब्दों के बीच
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प्रेम ऐसा चुनो कि बरसों बाद भी पलट कर देख सको ।

प्रेम ऐसा चुनो कि बरसों बाद भी पलट कर देख सको । "अभी " नहीं.... "कभी " वाला प्रेम चुनो सदा । *सदा* जानते हैं? कितना होता हुआ शब्द है। ठीक जैसे तुम ना....बस जैसे तुम
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें