भाषा / Language
ज़िन्दगी तुमसे लग कर कभी नहीं चलेगी
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ज़िन्दगी तुमसे लग कर कभी नहीं चलेगी.....
पर तुम ज़िन्दगी से लग कर चलते रहना
😊
मेरे चेहरे पर ठहरे रहना....
हँसी ...उदासी
सुखन...शिकन
शोर...खामोशी
हां...ना
जो जी चाहो वही बनकर
*उतरते उतरते साल का आखिरी दिन भी उतर रहा
कई बार बीते हैं .....इन उतरते दिनों के दरमियां😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें