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आज साल का आखरी दिन है। पिताजी की आंख के ऑपरेशन की यही तारीख…

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आज साल का आखरी दिन है। पिताजी की आंख के ऑपरेशन की यही तारीख मिली ।तैयार होते वक्त कहने लगे ...नब्बे का हो गया हूं।अब चल देना चाहिए। मैंने कहा अभी कहां....नए साल में नई आंख से नए सिरे से दुनिया देखनी है अभी तो। पिताजी हंसते हुए बोले क्या आज साल का आखरी दिन है ? हमने कहा ...हां पिताजी बोले वाह नए साल में नई आंख आप स्वस्थ रहें। मुस्कुराते रहे। मेरी लाई किताबें आपके इंतजार में हैं। *ये पिताजी की दृष्टि नेत्रालय हल्द्वानी, जाते हुए की तस्वीर।मैंने चुपके से ली है। स्मार्ट लग रहे ना?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें