कल्पनाशब्दों के बीच
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आज अच्छी धूप है। बालकनी में दो फूल खिले हैं।

आज अच्छी धूप है। बालकनी में दो फूल खिले हैं। एक वो ....एक मैं मुझे fool भी कहा जा सकता है। तस्वीरें खींचना मन बहलाने जैसा है मेरा। हैड फोन पर ट्रेनिंग सेशन की आवाजें हैं। मन मेरी पसंदीदा किताब के एक मुड़े पन्ने को याद कर रहा। दिन बस सरक रहा।कोसा कोसा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें