भाषा / Language
कल भाई से मिलने गई थी।यहीं पास रहता है।साथ में दक्षु भी था।
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कल भाई से मिलने गई थी।यहीं पास रहता है।साथ में दक्षु भी था।
रास्ते में गाड़ी रोककर सड़क के किनारे एक दुकान से फल लेने लगी। दुकान में सब्जियां भी थी। करीब ३०० रुपए के फल लिए।
इतने में दक्षु बोला .... भैय्या फल के साथ क्या फ्री देते हो?
भैय्या..... कुछ नहीं।
दक्षु....ये तो गलत बात है ।३००की सब्जी लेता तो धनिया और मिर्च फ्री देते कि नहीं देते?
भैय्या....देता ।
दक्षु...तो लाओ फिर धनिया फ्री वाला
तुम फल और सब्जी वाले होकर दोनों में भेदभाव क्यों कर रहे?
भैया...दीदी तुम्हारा लड़का तेज़ है।
मैं....तेज़ नहीं जुगाड़ू है।
कल पहली बार संतरे और कीनू के साथ हरा धनिया मिला।
मुफ़्त मुफ़्त मुफ़्त
*दक्षु तू सही जा रहा। ये आखरी कीनू भी तेरा ही हुआ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें